गया के सिकंदर : The ‘Green Man’ of India

कटती वृक्षें करें पुकार 

मै हूँ धरती का श्रृंगार

दशरथ माँझी  से गया ‘माउंटेन मैन’ का शहर बन गया  तो  किसी ने  इसे ‘ग्रीन मैन’ ऑफ़ इंडिया के शहर से भी मशहूर कर दिया .

मिलिये सिकंदर से, ‘Green Man’ of India की ख्याति प्राप्त कर चुके सिकंदर गया के ही रहने वाले हैं और इनके कारनामे से आपको भी प्रेरणा मिलने वाली है .

सिकंदर ने अकेले अपने दम पर ब्रह्म्योनी और इसके आस-पास अनगिनत पेड़ -पौधे लगाये हैं. सिकंदर बताते हैं की उन्होंने यह कार्य 1982 से प्रारंभ किया और अब तक 30-35 वर्ष बीत जाने पर भी निरंतर इस कार्य में लगे हुए हैं.

सिकंदर कहते हैं की घर पे उनके तीन बच्चे हैं लेकिन पहाड़ो पर तो हजारों हैं जिनका लालन –पोषण उन्हें ही करना है. जब कोई पौधा सुख या मुर्झा जाता है तो उन्हें बहुत चोट पहुँचती है . बचपन में जब भी वह ब्रह्म्योनी के आसपास पिकनिक मनाने आते तो यह खाली बंजर जमीन उन्हें बड़ी अजीब लगती, तभी उन्होंने फैसला कर लिया कि इस सूखे को वे हरियाली में बदल कर रख देंगे. इस काम में लगन की वजह से वे गया के बाहर शायद हीं कभी गए. इसका आर्थिक नुकसान भी उन्हें उठाना पड़ा है. सिकंदर ने तरह तरह के पेड़–पौधे जैसे आम, अमरुद,अनार,नींबू, आँवला और शीशम लगाये हैं जो की न सिर्फ छाया और फ़ल देते हैं बल्कि पक्षियों को आकर्षित भी करते हैं.

सिकंदर ने पेड़-पौधों के नाम स्वतंत्रा सेनानियों के नाम पर भी रखे हैं.कारगिल में शहीद हुए जवानों पर भी उन्होंने पेड़-पौधों का एक कोना समर्पित किया है. पठानकोट में शहीद हुए जवानों को भी इन्होने कुछ इसी रूप में श्रधांजलि दी है.

सिकंदर का सपना गया जैसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल को हरियाली से सुंदर बनाने का है तथा साथ-साथ लोगों को वातावरण के प्रति जागरूक करने का भी है .

सचमुच !! सलाम है सिकंदर को. आज जब पूरा विश्व ‘ग्लोबल वार्मिंग’ और  ‘जलवायु परिवर्तन’ की समस्या से निपटने में लगा हुआ है, वहीं बिना किसी सहायता के सिकंदर ने यह कार्य तीन दशक पहले हीं शुरू कर दिया था .आज के युवा, शहरवासियों  के लिए प्रेरणा के श्रोत हैं सिकंदर.

आइये हम भी अपना थोड़ा समय निकाले,और एक वृक्ष लगायें. सिकंदर के निरंतर प्रयास में सहयोग दें और गया को हरा-भरा बनाये .

Video: Sikandar – The ‘Green Man’ of India

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